कविता
ये दास्तान कुछ ऐसी है
जीने के लिए सदक़े कम थे [1]मरने के लिए लम्हे कम थेचाहत का भरोसा कौन करेरिश्ते के लिए वादे कम थेये दास्तान ही ऐसी हैसुनने के लिए राज़ी कम थेमयख़ाने में रिंदों से कहा [2]पीने वाले समझे कम थेकहना लिख कर भी चाहा तोलिखने के लिए काग़ज़ कम थेजब आँख अचानक भर आईरोने के लिए कोने कम थेअब सुकूं आख़री ढूंढ लियाअर्थी के लिए कांधे कम थे