कविताआँखों का पानीआदित्य चौधरी कभी तू है बादलकभी तू है सागरकहीं बनके तालाब पसरा पड़ा हैकभी तू है बरखाकभी तू है नदियाकहीं पर तू झीलों में अलसा रहा हैमगर तेरी ज़्यादाज़रूरत जहाँ हैउसे सबने अाँखों का पानी कहा है