आदित्य चौधरीकविता · व्यंग्य · सम्पादकीय

कविता

जागोगे नहीं तो

जागोगे नहींतो उठोगे कैसे...उठोगे नहींतो बनोगे कैसे...बनोगे नहींतो जीओगे कैसे...जीओगे नहींतो हंसोगे कैसे...हंसोगे नहींतो मिलोगे कैसे...मिलोगे नहींतो सुनोगे कैसे...सुनोगे नहीं तोसीखोगे कैसे...सीखोगे नहीं तोकरोगे कैसे...करोगे नहींतो चलोगे कैसे...चलोगे नहींतो थकोगे कैसे...थकोगे नहींतो सोओगे कैसे...सोओगे नहींतो जागोगे कैसे...जागोगे नहींतो उठोगे कैसे...