कविता
जीवन का अहसास
एक लयबद्ध जीवन जीने की आसएक बहुत हीव्यक्तिगत जीवन का अहसासन जाने कब होगाहोगा न जाने कबएक घर हो दूर कहीं छोटा साजहाँ एकान्त की जहाँ माँग होसबसे ज़्यादाबस मिल ना पायेकभी एकान्तन खाने को दौड़े अकेलापनकुछ ऐसे ही भविष्य का आभासलेकिन झूठ है सबकुछये नहीं होगा कभी भी नहीं होगाकैसे होगा ये...कि रहे कहीं ऐसी जगहजहाँ सभी अपने होंऔर छोटे-छोटेहक़ीक़त भरे सपने हों...