आदित्य चौधरीकविता · व्यंग्य · सम्पादकीय

कविता

ये मुश्किल बात होती है

सुबह के आगमन से पहले काली रात होती हैइसे तुझको समझना है, ये मुश्किल बात होती हैतेरी हर हार में जीतों के नक़्शे बनते जाते हैंनई राहों को चुन लेना, ये मुश्किल बात होती हैहर इक सैलाब की सबको डुबो देने की फ़ितरत हैतुझे इससे गुज़रना है, ये मुश्किल बात होती हैकोई क्योंकर तुझे पूछे, तेरी औक़ात ही क्या हैनया कुछ कर दिखा जाना, ये मुश्किल बात होती हैज़माना आख़री दम तक तुझे बाँधेगा बंधन मेंनहीं थमना, नहीं झुकना, ये मुश्किल बात होती है