आदित्य चौधरीकविता · व्यंग्य · सम्पादकीय

कविता

सुन ले

मैं जहाँ से दिल की कह दूँतू वहाँ से इसको सुन लेमैं वहाँ से दिल की कह दूँतू यहाँ से इसको सुन लेमैं कहाँ से दिल की कह दूँतू जहाँ से इसको सुन ले